CERINA-Plan

Investitionen für den globalen Klimaschutz

Annual ArcticSeaIceMin Still.2015 1280 256

चेतावनी

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CERINA योजना – जलवायु संरक्षण के लिए निवेश

‘‘CERINA योजना’’ का अर्थ ‘‘CO2 उत्सर्जन एवं नवीकरणीय निवेश क्रिया योजना’’ है। निश्चित सीमाओं सहित प्रतिबंधक अवधारणा पर आधारित, क्योतो व्यवस्था के विपरीत, आई.डब्ल्यू.आर. एक तकनीकी निवेश पद्धति प्रस्तावित करती है जिसके अंतर्गत किसी देश के CO2 उत्सर्जनों को सीधे नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक में निवेश से जोड़ा जाता है।

पृष्ठभूमि

2014 में कुल वैश्विक CO2 उत्सर्जन 35.45 बिलियन टन था, जो 1990 – क्योतो प्रोटोकॉल संदर्भ वर्ष – की तुलना में 55 प्रतिशत अधिक है। क्योतो प्रोटोकॉल की मूल पद्धति प्रत्येक देश के CO2 उत्सर्जन को सीमित करना है। हालाँकि, 1990 के बाद से CO2 उत्सर्जनों में तीव्र वृद्धि यह दर्शाती है कि क्योतो व्यवस्था कारगर नहीं है। CERINA योजना के साथ, नवीकरणीय ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए आई.डब्ल्यू.आर. संस्था ने एक वैकल्पिक निवेश प्रतिमान विकसित किया है। उत्सर्जनों के वैश्विक स्थिरीकरण के लिए इस प्रस्ताव के आधार पर, देश-विशिष्ट CO2 उत्सर्जन को सीधे नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश से जोड़ा जाता है।

वैश्विक CO2 उत्सर्जन (मिलियन ट.)

CERINA योजना के लिए आर.ई. निवेश की आवश्यकता है

CERINA योजना का सिद्धांत यह है: किसी देश के CO2 उत्सर्जन जितने अधिक होंगे, नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक में प्रतिसंतुलन निवेश उतना अधिक होगा। सभी देश CO2 का उत्सर्जन करते हैं, इसलिए सैद्धांतिक रूप से प्रत्येक देश को उत्तरदायित्व स्वीकार कर अपना योगदान देना चाहिए। वार्षिक वैश्विक CO2 विकास दर (मिलियन टन में) ज्ञात होने के कारण, कम से कम लगातार बढ़ रहे CO2 उत्सर्जनों की क्षतिपूर्ति करने, और इस प्रकार से उन्हें कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन संयंत्र (शक्ति, ऊष्मा, ईंधन) के लिए आवश्यक वर्तमान निवेश परिकलित किया जा सकता है। 2014 में नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र में कुल वैश्विक निवेश 170-210 बिलियन यूरो था। CO2 उत्सर्जनों को स्थिर करने के लिए, आई.डब्ल्यू.आर. परिकलन यह दिखाते हैं कि निवेश कम से कम 500 बिलियन यूरो प्रति वर्ष तक बढ़ाया जाना चाहिए।

अवधारणा: देशो द्वारा CO2 उत्सर्जन की क्षतिपूर्ति

CERINA योजना की मूलभूत अवधारणा, विशिष्ट देशों को नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक में आवश्यक निवेश का, प्रत्येक देश के CO2 उत्सर्जनों की मात्रा द्वारा परिकलित, स्रोत-आधारित आबंटन करना है। किसी देश के CO2 उत्सर्जन जितने अधिक होंगे, प्रतिसंतुलन निवेश उतना अधिक होगा। कुल 35.45 बिलियन टन वैश्विक CO2 उत्सर्जनों और नवीकरणीय ऊर्जा में 567 बिलियन यूरो प्रतिसंतुलन निवेश के साथ, CO2 की अनुमानित लागत 16 यूरो प्रति टन है। CO2 उत्सर्जन के आधार पर, प्रत्येक देश के लिए नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक में देश-विशिष्ट निवेश निर्धारित किया जा सकता है। प्रत्येक देश के CO2 उत्सर्जन के आधार पर, आई.डब्ल्यू.आर. ने कुल 65 देशों के लिए आवश्यक आर.ई. निवेश परिकलित किया है।

उदाहरण: CERINA योजना के अनुसार प्रारंभ किए गए निवेश
CERINA योजना के अंतर्गत, 9.7 बिलियन टन CO2 उत्सर्जन के साथ, चीन को वायु शक्ति, सौर या जल एवं बायोमास संयंत्र के निर्माण के लिए 154 बिलियन यूरो का निवेश प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त राजनीतिक रूपरेखा परिवेश बनाना चाहिए। 2.1 बिलियन टन CO2 उत्सर्जन के साथ, भारत के लिए निवेश 33 बिलियन यूरो है और, 799.1 मिलियन टन के साथ, जर्मनी के लिए 13 बिलियन यूरो की आवश्यकता है। CERINA योजना में कम उत्सर्जन वाले छोटे देश भी शामिल हैं। कुल 45 मिलियन टन उत्सर्जन के साथ, हंगरी को 700 मिलियन यूरो वार्षिक निवेश की व्यवस्था करनी होगी और, 39 मिलियन टन के साथ, न्यूज़ीलैंड में प्रति वर्ष 600 मिलियन यूरो की आवश्यकता है।

निवेश प्रतिस्पर्धा द्वारा जलवायु संरक्षण का प्रोत्साहन

क्योतो प्रोटोकॉल प्रतिबंध पद्धति कई देशों, विशेष रूप से उद्योग, द्वारा अस्वीकार की गई है। CERINA योजना एक ऐसी निवेश अवधारणा पर आधारित है जो अकेले या अन्य जलवायु संरक्षण यंत्रों के संयोजन में कार्य कर सकती है। निवेश के लिए खुली प्रतिस्पर्धा राजनीतिक और औद्योगिक मण्डलों में जलवायु संरक्षण सिद्धंत के स्वीकरण को बढ़ाती है। यह एक वैश्विक आर.ई. निवेश श्रेणीकरण का निर्माण करता है जो अंतत: निर्यात आंकड़ों जितना महत्वपूर्ण हो सकता है। CERINA अवधारणा का महत्वपूर्ण लाभ प्रत्यक्ष युग्मन व्यवस्था है, जिसके सामर्थ्य से प्रत्येक देश के पास जलवायु संरक्षण संबंधी अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए दो पैरामीटर होते हैं: उत्सर्जन कम करना या नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाना। ये विकल्प देशों को उनके जलवायु संरक्षण संबंधी उपायों में अधिक गुंजाइश पेश करते हैं। उच्च उत्सर्जन वाले देशों की तुलना में निम्न उत्सर्जन आंकड़ों वाले देश कम योगदान देते हैं। प्रत्येक देश अपनी परिस्थितियों के अनुरूप एक समाधान चुन सकता है। नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता हुआ योगदान, या CO2 कटौती, या कुशलता में वृद्धि, अंतत: स्वचालित रूप से वैश्विक उत्सर्जनों को स्थिर या कम करेगी।